लिख रहा हूँ कुछ यादगार पॅलो को जिनका ज़िंदगी से कभी कभी वास्ता पड़ता है

// ज़िंदगी एक मंज़िल की और

हर मेहेक में एक नशा होता है
हर नशे की दवा होती है
कोई इसे खूबसूरती से नापता और निखरता है
तो कोई इसको दिल में दबाता हैं

// मैं

मिठास हसी मैं
आसू दर्द मैं
प्यार दिल मैं
बस यही चाहिए ज़िंदगी मैं

// जला दो मुझे

जला दो मुझे
मोहब्बत की कोई कीमत नही होती
जला दो मुझे
आँसुओं की कोई कीमत नही होती
दुनिया मैं आए हैं रंग भरने
लगता हैं
अब इस दुनिया मैं रंगो की कोई कीमत नही होती

लोग कहेते हैं परिया जन्नत मैं मिलती हैं
लेकिन उनसे हमारी मुलाकात तो कई महीनो से हो रही हैं

अभी एक जाम बाकी है
और तेरा नाम भी लेना बाकी है

// पल

खड़खड़ा रहा हूँ दरवाजा तेरे दिल ♥ का
कभी तो खुलेगा कुछ कहेने के लिए
और इस तरह इंतिज़ार कर रहा हूँ उस पल का
जब खुलेगा दरवाजा तेरे दिल का
मुझसे कुछ कहेने के लिए

कैसे काटु ये ज़िंदगी पिया
घुल रहा है इस मैं सब कुछ
कभी आंसू तो कभी दर्द पिया

खुशी ज़िंदगी के उन लम्हो की जिन्हे कोई देखता नही
दिल महेकता है तेरा
बात सुनता है वो मेरी
कुछ कहे बिना
सब कुछ जाहिर कर देता है
जानता हूँ मे सब कुछ
फिर भी कुछ कहता नही
रंग भरने की चाहत मे
सब कुछ करता चला जाता हूँ
तेरी एक हसी मे
ज़िंदगी भर की खुशियाँ तलाश हूँ

मैं इस उम्मीद मे चल रहा था
की वक़्त चलके खुद आएगा
क्या पता था मुझको
की लोग वक़्त को थाम लेते है

खत प्यार का, दर्द का और मेरे आँसूऊ का
खून से लिखे खत को पहुचाऊ कैसे
पहुचा भी दीया तो दर्द को दीखाऊ कैसे
खून से लिखे खत को पहुचाऊ कैसे
पहुचा भी दीया तो दिल का दर्द दीखाऊ कैसे
दर्द इतना है की बया भी नही किया जा रहा है खत मे
खत से आगे बात ब्डाऊ कैसे
इस दर्द को दीखाऊ कैसे
बात आगे ब्डाऊ कैसे
अगर मे ज़िंदा बच गया
तो मोत को गले लगाऊ कैसे
खून से लिखे खत को तुझ तक पहुचाऊ कैसे
इस आस मे ज़िंदगी बीताऊ कैसे
तेरे लबजो को मोहब्बतें बनाऊ कैसे

// कोसिश कुछ कहेने की तुझसे……

तेरे फूल से चेहेरे से मेरी नज़र हटती नही
आसू मेरे रूक्ते नही
देखु तुझको जब्भी
दिल की धड़कन मेरे सुनती नही और आसू मेरे रूक्ते नही